गणेश जी की माता
भगवान गणेश जी की माता देवी पार्वती हैं। नीचे उनका विस्तृत और सरल वर्णन दिया गया है:
⭐ देवी पार्वती — गणेश जी की माता
देवी पार्वती हिंदू धर्म में शक्ति स्वरूपा मानी जाती हैं। वे भगवान शिव की पत्नी और गणेश जी व कार्तिकेय जी की माता हैं। उन्हें शिवानी, गौरी, उमा, अंबिका, दुर्गा और काली जैसे अनेक नामों से पूजा जाता है।

🌼 देवी पार्वती का स्वरूप और विशेषताएँ
🔹 शक्ति की अवतार
वे आदि शक्ति का स्वरूप हैं—जो इस सृष्टि की मूल ऊर्जा है।
उनके बिना शिव भी ‘शव’ समान माने जाते हैं (अर्थात शक्ति ही जीवन देती है)।
🔹 सौम्य और उग्र रूप
पार्वती जी के दो मुख्य स्वरूप माने जाते हैं:
- सौम्य रूप
- गौरी
- अन्नपूर्णा
- पार्वती
इन्हें शांति, प्रेम, सौंदर्य और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
- उग्र रूप
- काली
- दुर्गा
- चामुंडा
ये रूप अधर्म का विनाश करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।
🌺 गणेश जी के जन्म से जुड़ी कथा
कथा अनुसार, माता पार्वती अकेले स्नान करने के लिए गईं और उन्होंने अपने शरीर के उबटन (गंद) से एक बालक की रचना की।
उन्होंने उसे द्वार पर पहरा देने को कहा।
जब शिव जी आए, तो गणेश जी ने उन्हें रोका।
इससे क्रुद्ध होकर शिव जी ने बालक का सिर काट दिया।
जब पार्वती ने यह देखा तो वे बहुत दुखी हुईं।
तब शिव जी ने गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया—और इसी तरह गणेश जी का जन्म माना जाता है।
🕉️ देवी पार्वती का महत्व
- माता पार्वती भक्तों को शक्ति, बुद्धि, सौभाग्य और शांति प्रदान करती हैं।
- वे संसार की जननी मानी जाती हैं।
- उनका विवाह शिव जी से बेहद पवित्र और अध्यात्मपूर्ण माना जाता है।
यदि आप चाहें, मैं गणेश जी की पूरी जन्म कथा, शिव–पार्वती विवाह कथा, या पार्वती जी के 108 नाम भी बता सकता हूँ।