भगवान गणेश जी के भाई भगवान कार्तिकेय हैं। उन्हें कई नामों से जाना जाता है—कार्तिकेय, मुरुगन, स्कंद, कुमारस्वामी, शक्तिधर, सुब्रमण्य आदि।
नीचे उनका विस्तृत वर्णन सरल भाषा में दिया गया है:
⭐ भगवान कार्तिकेय — गणेश जी के भाई
भगवान कार्तिकेय शिव जी और माता पार्वती के दूसरे पुत्र हैं। वे देवताओं के सेनापति माने जाते हैं और युद्ध कला, शौर्य और ज्ञान के देवता हैं।

🔱 मुख्य पहचान
1. देव सेना के सेनापति
- कार्तिकेय जी को देवताओं की सेना का अधिपति माना गया है।
- जब देवताओं को दैत्य तारकासुर से मुक्ति चाहिए थी, तब कार्तिकेय जी ने ही उसका वध किया।
2. युवा, तेजस्वी और वीर
- उनका स्वरूप बहुत तेजस्वी और सुन्दर बताया गया है।
- उन्हें अक्सर छः मुख (षडानन) के साथ दर्शाया जाता है, जो छः दिशाओं में जागरूकता का प्रतीक है।
- इसलिए उन्हें षण्मुख भी कहते हैं।
3. वाहन — मयूर (मोर)
- कार्तिकेय जी का वाहन मोर है, जिसे “परवनी” कहा जाता है।
- मोर अहंकार पर विजय और सुंदरता का प्रतीक है।
🌺 जन्म कथा
कार्तिकेय जी का जन्म विशेष उद्देश्य से हुआ:
- देवताओं को असुर तारकासुर को मारने के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली पुत्र की आवश्यकता थी।
- इसलिए शिव-पार्वती के तेज से कार्तिकेय जी का जन्म हुआ।
- उन्हें कृतिका देवियों ने पाला, इसलिए वे कार्तिकेय कहलाए।
🌼 दक्षिण भारत में विशेष पूजा
- दक्षिण भारत में उन्हें मुरुगन या सुब्रमण्य के नाम से अत्यधिक पूजा जाता है।
- तमिल संस्कृति में वे “तमिऴ कडवुल” (तमिलों के प्रिय देव) माने जाते हैं।
- पलानी, तिरुचेंदूर, स्वामिमलई जैसे स्थान उनके प्रसिद्ध धाम हैं।
🕉️ गणेश–कार्तिकेय संबंध (भाइयों की कथा)
एक प्रसिद्ध कथा है कि एक बार शिव और पार्वती ने दोनों पुत्रों को कहा कि
“जो सबसे पहले पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा कर आएगा, वही विजेता होगा।”
कार्तिकेय जी तुरंत अपने मोर पर बैठकर निकल पड़े,
लेकिन गणेश जी ने बुद्धि का परिचय देते हुए शिव और पार्वती की ही परिक्रमा कर दी,
क्योंकि उनके लिए माता-पिता ही पूरा संसार थे।
इस प्रकार गणेश जी विजेता बने।
यदि आप चाहें, मैं कार्तिकेय जी की विशेष कथाएँ, मुरुगन मंदिरों, या उनके 108 नामों के बारे में भी बता सकता हूँ।