नीचे भगवान गणेश जी की प्रमुख और लोकप्रिय कथाएँ सरल भाषा में दी गई हैं। आप इन्हें बच्चों को भी सुना सकते हैं—बहुत रोचक और प्रेरणादायक हैं।


1. गणेश जी का जन्म — हाथी का सिर कैसे लगा?

एक बार माता पार्वती स्नान कर रही थीं। उन्होंने अपने उबटन (गंद) से एक बालक बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा।
इसी दौरान शिव जी वापस आए और अंदर जाना चाहा। बालक (गणेश) ने उन्हें रोका।

शिव जी को यह अपमान लगा और क्रोध में उन्होंने बालक का सिर काट दिया।

पार्वती दुख से व्याकुल हो गईं। उन्हें शांत करने के लिए शिव जी ने कहा कि वे गणेश को पुनर्जीवित करेंगे।
उन्होंने अपने गणों को कहा कि पहले जीवित प्राणी का सिर लेकर आओ—जो एक हाथी का बच्चा निकला।
शिव जी ने वह सिर गणेश जी पर लगाया और वे पुनर्जीवित हो गए।

इसी तरह गणेश जी गजानन (हाथी-मुख वाले) कहलाए।


2. गणेश जी ने सबसे पहले पूरी दुनिया की परिक्रमा कैसे की?

एक बार शिव-पार्वती ने गणेश और कार्तिकेय दोनों से कहा—
“जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा, वही विजेता होगा।”

कार्तिकेय तुरंत अपने मोर पर बैठकर निकल पड़े।
लेकिन गणेश जी ने अपनी बुद्धि लगाई। उन्होंने शिव और पार्वती की परिक्रमा की और कहा—
“मेरे लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं।”

इस बुद्धिमानी से वे विजेता बने।

गणेश जी की प्रमुख और लोकप्रिय कथाएँ

3. गणेश जी और चाँद का श्राप

एक बार गणेश जी मोदक खाकर लौट रहे थे। रास्ते में उनका पेट भारी होने से वे लड़खड़ा गए और चंद्रमा ने उन पर हँसी उड़ाई।
गणेश जी ने क्रोधित होकर कहा—
“जो भी व्यक्ति तुझे निहारेगा, उसे अपशकुन होगा।”

इसी कारण गणेश चतुर्थी के दिन चाँद देखना अशुभ माना जाता है
बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने श्राप को नरम किया—
“जो मेरी कथा सुनेगा, उसे दोष नहीं लगेगा।”


4. व्यास ऋषि के साथ महाभारत लिखवाई

एक बार महर्षि व्यास ने पूरी महाभारत लिखने के लिए किसी योग्य लेखक की खोज की।
गणेश जी तैयार हुए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी—
“आप बिना रुके बोलते रहेंगे।”

व्यास जी ने भी शर्त रखी—
“आप लिखने से पहले अर्थ समझकर लिखेंगे।”

इससे व्यास जी जटिल श्लोक बोलते और गणेश जी अर्थ समझने तक ठहर जाते।
इसी तरह महाभारत की रचना हुई।


5. क्यों तोड़ा गणेश जी का दाँत?

महाभारत लिखते समय एक बार गणेश जी की कलम टूट गई।
लिखना न रुके, इसलिए उन्होंने अपना दायाँ दाँत तोड़कर कलम बना लिया
इसलिए वे एकदंत (एक दाँत वाले) कहलाते हैं।


6. मोदक क्यों प्रिय हैं?

एक बार देवताओं ने पार्वती जी को दिव्य “ज्ञान-लड्डू” दिया।
पार्वती जी ने इसे अपने दोनों पुत्रों में से उस बच्चे को देना चाहा जो उसके योग्य हो।
कार्तिकेय ने संसार की यात्रा की, जबकि गणेश जी ने माता-पिता की ही परिक्रमा कर दी।

गणेश जी विजेता बने और उन्हें वह “मोदक” मिला, तभी से मोदक उनका प्रिय भोजन है।

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